ताराचंद ने कोचिंग नहीं ली। यूट्यूब और किताबों से ही पढ़ाई की। वे रोज़ 10 घंटे पढ़ते थे और 2 से 4 घंटे लिखने की प्रैक्टिस करते थे क्योंकि उनके दोनों कंधों में दर्द था। उन्होंने हर विषय को समझकर पढ़ा, रटने की बजाय उसे आसान भाषा में शॉर्ट नोट्स बनाकर दोहराया। वे पुराने जमाने की पढ़ाई की तरह, हर टॉपिक को पढ़कर उसका सार समझते और खुद को समझाते थे।