वाहन और ध्वनि प्रदूषण बीयू के लिए बना सिरदर्द

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रात्रि प्रतिबंध से रात के दौरान राहत मिली। लेकिन, अब दिन के दौरान समस्या और बढ़ गई है। वाहनों की आवाजाही और ध्वनि प्रदूषण से शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। बीयू प्रशासन भी ज्ञानभारती परिसर के अंदर वाहनों की बढ़ती संख्या और वाहनों की लगातार आवाजाही से परेशान है। इससे निपटने के लिए बीयू मैसूरु रोड और उल्लाल मेन रोड को जोडऩे वाले 2.5 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण करने की योजना बना रहा है।

अधिकारियों के अनुसार बीयू ने उपमुख्यमंत्री और बेंगलूरु विकास मंत्री डी. के. शिवकुमार के ज्ञानभारती परिसर के हालिया दौरे के दौरान उनके समक्ष फ्लाईओवर के निर्माण का प्रस्ताव रखा है। दुर्घटनाओं का खतरा
ज्ञानभारती परिसर से दो मुख्य सड़कें गुजरती हैं। इनमें से एक मैसूरु रोड से उल्लाल की ओर और दूसरी नागरभावी से केंगेरी की ओर जाती है। इन दोनों सड़कों पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक रहता है और पीक ऑवर्स के दौरान दुर्घटनाएं आम बात हैं। छात्र संगठन भी लंबे समय से परिसर के अंदर सार्वजनिक वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं।

वाहन पार्क कर टहलने निकल जाते हैं
लोग पीएचडी स्कॉलर लोकेश राम ने कहा, हम कैंपस में कई दुर्घटनाएं देखते हैं। छात्रावास में रहने वाले हमारे कई दोस्त इसका शिकार बन रहे हैं। सुबह के समय, पैदल चलने वाले और जॉगिंग करने वाले लोग अपने वाहन लेकर कैंपस में घुस जाते हैं। वाहनों को पार्क कर टहलने निकल जाते हैं। हमारी मांग है कि इस पर भी रोक लगाई जाए। फ्लाईओवर बनने से निश्चित रूप से इन सब पर रोक लगेगी।
एक अन्य छात्र के अनुसार लोग कचरा फेंकने के लिए कारों, बाइकों से कैंपस में प्रवेश करते हैं। अगर यह जारी रहा, तो छात्रों को मार्शल के रूप में काम करने और आगंतुकों को प्रवेश द्वार पर रोकने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

आवागमन एक जैसा
कई छात्रों का आरोप है कि आधी रात को भी परिसर के अंदर वाहनों का आवागमन एक जैसा ही रहता है। प्रतिबंध को सख्ती से लागू नहीं किया गया है। बीयू के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण बढ़ गया है। वाहनों की आवाजाही के कारण कक्षाएं लेना और छात्रों के लिए ध्यान केंद्रित करना रोजमर्रा की समस्या बन गई है।

निर्णय जल्द
ज्ञानभारती परिसर से गुजरते हुए मैसूरु रोड और उल्लाल मेन रोड को जोडऩे वाले फ्लाईओवर के निर्माण का प्रस्ताव है। इस पर चर्चा चल रही है और हम जल्द ही इस संबंध में उचित निर्णय लेंगे।
-डॉ. एम.सी. सुधाकर, उच्च शिक्षा मंत्री



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