
इस तरह काम करता है प्लेन का टॉयलेट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Aviamonde के संस्थापक और एयरलाइन पायलट ड्यूक आर्मिटेज कहते हैं कि वेस्ट पार्ट को एक वैक्यूम तंत्र के द्वारा खींचा जाता है और पाइप की मदद से वेस्ट टैंक की सफाई होती है। विमान जब लैंड करता है तो ‘हनी ट्रक’ इस वेस्ट मैटेरियल को इक्ट्ठा कर इसका निपटान करता है।
Amazing Facts: पीला ही क्यों होता है स्कूल बस का रंग? वजह जानकर पकड़ लेंगे सिर
जमीन पर डंप नहीं होता वेस्ट
वहीं एक वायरल TikTok वीडियो में, गैरेट नाम के एक पायलट, @flywithgarrett ने हवाई जहाज के बाथरूम के बारे में बात की। इस व्यक्ति ने कहा, “क्या आप जानते हैं कि जब भी आप विमान में शौचालय को फ्लश करते हैं, तो यह वास्तव में नीचे जमीन पर रह रहे लोगों पर डंप नहीं होता है। यह प्लंबिंग के माध्यम से विमान के पीछे सील डिब्बों में जाता है। प्लेन के लैंडिंग करने पर ग्राउंड क्रू इस कचरे को हटा देती है।” इस व्यक्ति ने आगे जानकारी देते हुए कि लंबी दूरी के दौरान प्लेन के टॉयलेट में एक हजार से अधिक बार फ्लश किया जा सकता है, जिससे 320 गैलन से अधिक वेस्ट मैटेरियल उत्पन्न होता है।
किसी को फोन करते ही सबसे पहले HELLO क्यों बोलते हैं? जानिए
हवाई जहाज का टॉयलेट घर से कितना अलग है?
हवाई जहाज का टॉयलेट सिस्टम घरों में इस्तेमाल होने वाले टॉयलेट की तुलना में बिल्कुल अलग है। यह वैक्यूम आधारित तकनीक पर काम करता है, जो बाहरी और अंदर के प्रेशर के अंतर को उपयोग करके कचरे को तेजी से हटाता है। इस सिस्टम में पानी कम खपत होता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, जहां घरेलू टॉयलेट में एक फ्लश के लिए 6 से 10 लीटर पानी चाहिए, वहीं प्लेन के टॉयलेट में सिर्फ 0.5 से 1 लीटर पानी ही इस्तेमाल होता है।