Bhagat Singh: 23 मार्च, 193, यही वो तारीख थी, जिस दिन शहीद-ए-आज़म भगत सिंह(Bhagat Singh) को फांसी दी गई थी। तीनों क्रांतिकारियों(भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव) को 12 घंटे पहले ही फांसी दे दी गई थी। अगले दिन सुबह छह बजे की बजाय उन्हें उसी शाम सात बजे फांसी पर चढ़ा दिया गया था। लाहौर सेंट्रल जेल में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी। ऐसे कई मौके आए जब भगत सिंह को अपने लिए लड़ाई लड़कर खुद को बचाना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इस बारे में उनका जवाब था कि “इन्कलाबियों को मरना ही होता है, क्योंकि उनके मरने से ही उनका अभियान मज़बूत होता है, अदालत में अपील से नहीं। ऐसे थे स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी भगत सिंह। बहुत अच्छी बातों में से एक बात यह भी थी कि उनको किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। कई रिपोर्ट्स में इस बात का जिक्र किया गया है कि अपने अंतिम समय में भी भगत सिंह किताबों में खोए हुए थे। वो अपने दोस्तों से कई बार किताबें जेल में मंगवाते थे, और उसे पढ़ते थे।