सोशल मीडिया प्लेटफार्म Linkedin पर एक पूर्व IAS ने उनकी स्टोरी शेयर की है। प्रिंसिपल ने पद की गरिमा को दिखावे के बजाय जिम्मेदारी के रूप में स्वीकारते हुए उन्होंने घमंड को एक तरफ रख दिया और सेवा को अपना धर्म बना लिया। जब उनसे किसी ने पूछा कि एक प्रिंसिपल होकर वे खुद सफाई क्यों करते हैं, तो उन्होंने मुस्कराते हुए जवाब दिया, पद आराम नहीं, जिम्मेदारी लाता है। यदि मुझे दिल से पढ़ाना है, तो पहले विद्यालय को स्वच्छ रखना मेरा कर्तव्य है।