175 साल पहले जिस इमारत से महिला शिक्षा की शुरुआत हुई थी, आज वह जर्जर अवस्था में है। कभी इस स्कूल ने महिलाओं को पढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाने का मार्ग दिखाया था, लेकिन आज वह बंद पड़ा है। कई बार इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग उठ चुकी है, पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हालांकि पहले स्कूल के बाद देश में कई स्कूल खुले, जिसका मुख्य उद्देश्य लड़कियों की पढ़ाई को बढ़ावा देना था। लेकिन सावित्रीबाई फुले ने बहुत पहले इसी शुरुआत कर दी थी।