जिलों का स्कोर
सलूंबर जिला 41, फलौदी 40, कोटपूतली-बहरोड़ 39, खैरथल-तिजारा 38, डीडवाना-कुचामन 37, डीग 36, ब्यावर 35, बालोतरा 34वें स्थान पर रहा है। इन जिलों में पैरामीटर्स के अनुसार स्कूलों और कार्यालयों का संचालन नहीं हो रहा है। इन जिलों में डीईओ, सीडीईओ, सीबीईओ, स्टाफ आदि की कमी चल रही है। इसके साथ ही यहां पर संसाधनों का भी अभाव है।
इन पैरामीटर्स के आधार पर जारी हुई रैंकिंग
स्कूलों की रैंकिंग के लिए इस बार नए पैरामीटर्स जारी किए गए हैं, जिसमें पिछले सत्र चयनित इंस्पायर अवार्ड, एसटीएसई, एनटीएसई, इंदिरा प्रदर्शनी, गार्गी, विज्ञान प्रदर्शनी, सांस्कृतिक व कला महोत्सव, एनएमएमएस में चयनित विद्यार्थियों की संख्या के साथ ही बीते महीने में कुल नामांकन के अनुसार विद्यार्थियों की उपस्थिति, वर्तमान महीने में विद्यार्थियों को पुस्तकालय की पुस्तकों का विवरण करने वाले, बोर्ड परीक्षा में 4 या 5 स्टार रेटिंग प्राप्त करने वाले स्कूलों का प्रतिशत, कुल नामांकन में प्रतिशत वृद्धि, आईसीटी लैब स्मार्ट कक्षा-कक्ष युक्त स्कूलों की संख्या, स्कूलों में खेल मैदान हैं या नहीं, इनकी दशा के आधार पर यह रैंकिंग जारी की गई है।
इसमें कुल 12 बिंदु शामिल किए हैं। इन सभी बिंदुओं का कुल स्कोर 105 है। सरकारी स्कूलों स्टार रैंकिंग तथा जिला, ब्लॉक एवं स्कूल स्तर की समग्र शैक्षिक रैंकिंग के पैरामीटर्स के आधार पर यह रैंकिंग जारी की गई है।
टॉप-5 जिले
प्रथम – सवाई माधोपुर
द्वितीय – सीकर
तृतीय – चूरू
चतुर्थ- कोटा
पंचम – हनुमानगढ़ नए जिलों को भी रैंकिंग में शामिल किया गया है। इससे कई जिलों की रैंकिंग में सुधार हुआ है। इसमें अलवर भी शामिल है। मनोज शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, अलवर
खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों की अलग रैंकिंग जारी होने से अलवर को फायदा मिला है। इस बार जिले का 12वां स्थान रहा, जबकि पहले जिला 26वें स्थान पर था। उस समय ये दोनों जिलों को शामिल करके अलवर की रैंकिंग जारी की गई थी। इन जिलों में शैक्षणिक संसाधनों के अभाव की वजह से रैंकिंग गिर रही थी।